milap singh

milap singh

Saturday, 6 September 2014

बेटे की मां


वो बेटा लालची है या निकम्मा है
जो अपने बूढे बाप से काम करवाता है

उस बीबी की सुंदरता किस काम की
जो भडक उठे जब पति मां से मिलने जाता है

तू भी तो इक मां है  बेटे की
क्यों भूल रही है बुढापा सबको आता है

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

आपका गम


कब रहे थे काम के हम
जब मिले थे तुमसे

वो तो जी गए जहान में
कुछ दिन बाप के दम से

जुर्रत क्या थी खुदा की
कि जो उठा लेता यूं बेवक्त

हम तो मर गए थे सनम
सिर्फ आप के गम से

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 5 September 2014

Had me


हद में चाहत हद में नफरत
और हद में अच्छी
हर चीज होती है
तुम हद में रह कर किया करो हरकत
फिर मत कहना
कि किस्मत बदतमीज होती है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

कम लगता है


कम ही लगेगा सारा जीवन फिर भी
चाहे सौ साल भी यहां कोई जी जाए
कल की ही बात लगेगी हर घडी उसे
चाहे अंत समय सिर पर ही आ जाए

- - - - मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 4 September 2014

तुम जो हंसती हो तो


तुम जो हंसती हो तो
मौसम-ए-बहार आता है

तुम जो हंसती हो तो
कलियों में निखार आता है

यूंही मत मुस्कुराया करो
तुम गैरों के बीच भी

तुम जो हंसती हो तो
बेकाबू सा प्यार आता है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 3 September 2014

Jindgi me

Hindi shayari
@ @ @ @ @ @ @

जिंदगी में कई बार
कितने ही मजाक होते हैं

पर उनको फर्क नहीं पडता
जिनके दिल साफ होते हैं

आपसी भरोसे से ही तो चलती है
यह रिश्तों की गाडी

शक से तो अक्सर
दुनिया में तालाक होते हैं

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 2 September 2014

सितंबर

आया   महीना   सितंबर
बदल  गया सब   मंजर
राहत  मिली  पसीने  से
निकल गया गर्मी का खंजर

---- मिलाप सिंह भरमौरी