वो बेटा लालची है या निकम्मा है
जो अपने बूढे बाप से काम करवाता है
उस बीबी की सुंदरता किस काम की
जो भडक उठे जब पति मां से मिलने जाता है
तू भी तो इक मां है बेटे की
क्यों भूल रही है बुढापा सबको आता है
-------- मिलाप सिंह भरमौरी
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वो बेटा लालची है या निकम्मा है
जो अपने बूढे बाप से काम करवाता है
उस बीबी की सुंदरता किस काम की
जो भडक उठे जब पति मां से मिलने जाता है
तू भी तो इक मां है बेटे की
क्यों भूल रही है बुढापा सबको आता है
-------- मिलाप सिंह भरमौरी
कब रहे थे काम के हम
जब मिले थे तुमसे
वो तो जी गए जहान में
कुछ दिन बाप के दम से
जुर्रत क्या थी खुदा की
कि जो उठा लेता यूं बेवक्त
हम तो मर गए थे सनम
सिर्फ आप के गम से
------ मिलाप सिंह भरमौरी
हद में चाहत हद में नफरत
और हद में अच्छी
हर चीज होती है
तुम हद में रह कर किया करो हरकत
फिर मत कहना
कि किस्मत बदतमीज होती है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
कम ही लगेगा सारा जीवन फिर भी
चाहे सौ साल भी यहां कोई जी जाए
कल की ही बात लगेगी हर घडी उसे
चाहे अंत समय सिर पर ही आ जाए
- - - - मिलाप सिंह भरमौरी
तुम जो हंसती हो तो
मौसम-ए-बहार आता है
तुम जो हंसती हो तो
कलियों में निखार आता है
यूंही मत मुस्कुराया करो
तुम गैरों के बीच भी
तुम जो हंसती हो तो
बेकाबू सा प्यार आता है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
Hindi shayari
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जिंदगी में कई बार
कितने ही मजाक होते हैं
पर उनको फर्क नहीं पडता
जिनके दिल साफ होते हैं
आपसी भरोसे से ही तो चलती है
यह रिश्तों की गाडी
शक से तो अक्सर
दुनिया में तालाक होते हैं
----- मिलाप सिंह भरमौरी
आया महीना सितंबर
बदल गया सब मंजर
राहत मिली पसीने से
निकल गया गर्मी का खंजर
---- मिलाप सिंह भरमौरी