milap singh

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Saturday, 28 January 2017

इश्क का रंग

इश्क के आगे हर रंग फीका लगता है।
हारकर भी सब कुछ जीता सा लगता है।
कुछ फर्क नहीं पडता अब तेरे दिए हुए जख्मों से,,
तेरा दिया दर्द भी अब मीठा सा लगता है।

............ मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 25 November 2014

Kab tak


कब तलक आखिर
यूंही लडखडाया जाए

क्यों न इक कदम
तेरी ओर बढाया जाए

बहुत सुनते आए हैं
इक नाम मुकद्दर का

क्यों न आज इसे भी
आजमाया जाए

-- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 24 November 2014

Bisaat


सब उसकी बिछाई बिसात है
कोई समझता है सब उसके हाथ है

हर हरकत पे है पूरी उसकी कमान
उसकी मर्जी से बनती हर बात है

मालिक है वो इस सारे जहाँ का
हर इंसान जर्रा उसका दास है

पल का नहीं है पर कोई भरोसा
बेशक चल रही अभी पूरी सांस है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 5 October 2014

तेरी यादें


तेरी यादें  मुझसे  कुछ कहती हैं
तू  अभी भी मेरे दिल में  रहती है
वो जमाना फिर उमड के आता है
तू  आंखों से  फिर कुछ  कहती है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 28 September 2014

हिन्दोस्तानी है


गर्व है कि हमको कि हम हिन्दोस्तानी है
अमनो -चैन- इमान यहां की निशानी है
प्यार से रहते हैं यहाँ मिलजुल कर सब
वरना अब भी दुनिया इससे अनजानी है

      ---------- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 27 September 2014

Love jehad

Hindi shayari
☆☆☆☆☆☆☆

यह तो सच है कि मोहब्बत में
कोई मजहब या जात नहीं होती

यह तो उन्मुक्त पतंग है
जिसकी डोरी किसी के हाथ नहीं होती

पर पहले मोहब्बत फिर शादी और
फिर जबरन धर्म को बदल देना

लव जेहाद नहीं तो ओर क्या है यह
पाक दिल में तो ऐसी कोई बात नहीं होती

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 26 September 2014

दौलत का नशा


जब दौलत का नशा सिर चढ जाता है
फिर भाई का दुश्मन भाई बन जाता है

रोज होती  है कोर्ट -कचहरी  की बातें
रोज किस्सा दो  गज  का बन जाता है

फिर भूल  जाते हैं सब आगे  पीछे का
बस  बदले  के लिए  मन ठन  जाता है

क्यों भूल जाते हैं इंसानियत को इंसान
ये दौलत का खजाना कब संग जाता है

    ---------- मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 25 September 2014

तिनका

गलती तो तिनके की है
जो खुद को पर वाला समझता है

वरना उसको तो उडाने में
सब जोर तुफान का लगता है

आखिर जी भर जाता है
तुफान का  खेल के कुछ पल

और नासमझ तिनका फिर
औंधे मुंह जमीन पे गिरता है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 23 September 2014

हिन्दू दर्शन


हो रहा गांव मोहल्ले में
रामायण का मंचन

लहरा रहा धरा पर
भगवा हिन्दू धर्म का परचम

नवरात्रो की हो हार्दिक
बधाई सभी को

यूहीं उजाला फैलाता रहे
अपना हिन्दू दर्शन

  ---- मिलाप सिंह भरमौरी

Choti ke bal


दो दिन क्या दूर रहे
ख्याल बदल गए हैं

सिर की लम्बी चोटी के
बाल बदल गए हैं

अभी अभी आया हूँ
और जाने को पूछते हैं

हैरान हूँ कि यार के
सबाल बदल गए हैं

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 22 September 2014

Sadma teri judai ka


सदमा तेरी जुदाई का
न हमसे सहा जाएगा

बिछुड कर एक पल भी
न हमसे रहा जाएगा

देख तू भूल कर भी
बिछुडने की न सोचना

क्योंकि लफ्ज पानी भी
न हमसे कहा जाएगा

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 21 September 2014

भारत देश महान


मत बन दुनिया तू अनजान
भारत देश है सबसे महान

जगह जगह गाड रहा तिरंगा
चंद्र हो या मंगल अभियान

गंगा यमुना है तहजीब हमारी
सर्व धर्म है भारत के प्राण

इक मानवता ही तो है मूल धर्म
बांट रहा है यह सबको ज्ञान

----- मिलाप सिंह भरमौरी

बेबफाई ही सही


तेरे प्यार की सौगात
रुसवाई ही सही

मुझे महफिल न मिली
तन्हाई ही सही

चलो ऐसा तो नहीं
के कोई ताल्लुक ही न था

तुझसे कुछ तो मिला
बेबफाई ही सही

----- मिलाप सिंह भरमौरी

विश्व शांति दिवस


जोश हो प्रगति के लिए
हथियारों के मुंह खामोश रहे

मानवता की भलाई के लिए
बस कारीगरों के औजार चले

नफरत के बीज न पनप सके
हर मजहब के लिए प्यार पले

विश्व शांति दिवस की आज
सब लोग बधाई स्वीकार करें

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 20 September 2014

दिल की गहराई


दिल की गहराई में कोई
उतरता ही नहीं है

मैं जिसको चाहूँ
मेरा बनता ही नहीं है

मैं कहता हूँ
बदल जा जमाने के साथ

दिल है मेरा कि
बदलता ही नहीं है

- - - - - मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 19 September 2014

नशा तुम्हारा


सुनने वाला अचानक ही
इक झटका सा खा जाता है

जब चली हुई किसी बात में
जिक्र तुम्हारा आ जाता है

वैसे भी कब बस चलता है
जब मन से दिल हट करता है

फिर चढते चढते नशा तुम्हारा
जिस्मो जां तक छा जाता है

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 18 September 2014

लजीज खुशबू


जब भी पडोसी की रसोई से
लजीज सी खुशबू आती है

अकेलेपन की यह जिंदगी
ओर भी बोझिल हो जाती है

दिल में आता है कि अब
तोड दूं सब अकेलेपन के बंधन

उसको साथ ले आने की
तमन्ना सी हो जाती है

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 17 September 2014

हर पल सोचता हूँ


मैं हर पल सोचता रहता हूँ
तेरे बारे में

क्या तेरे दिल में भी
मेरे लिए कुछ ख्याल आता है

मैं कौन हूँ क्या लगता हूँ तेरा
इस तरह का कभी मन में
सवाल आता है

मैं तो बस तुमको ही पाता हूँ
चाहे जिधर भी नजर उठा लूं

क्या तेरी धडकनो में भी
मुझे देखकर कुछ उछाल आता है

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 16 September 2014

Aman ki ujale


कश्मीर के लोग अब
अपनी इस फौज के दिवाने हो रहे हैं

यह देख के चंद लोगों के
मुंह काले हो रहे हैं

रुकावट डाल रहे हैं वो
राहत के पाक कामों में

डर गए हैं वो देख के
घाटी में तो अमन के उजाले हो रहे हैं

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 14 September 2014

दूर रहने से


प्यार दूर रहने से
ओर भी बढ जाता है

हर घडी साथ रहे तो
सिर खाता है

जान निकल जाती है फिर
चढने और उतरने में

दूर से तो पर्वत
सबको खूब भाता है

---- मिलाप सिंह भरमौरी