बादल हट गए हैं सब
मौसम साफ लगता है।
जमीं पर गिरा पानी
फिर भी खिलाफ लगता है।
फिर उडेगा हवा में
जुडेगा मिलेगा कणों से।
अभी ग्रहन कर रहा है
सूरज से यह ताप लगता है।
........ मिलाप सिंह भरमौरी
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बादल हट गए हैं सब
मौसम साफ लगता है।
जमीं पर गिरा पानी
फिर भी खिलाफ लगता है।
फिर उडेगा हवा में
जुडेगा मिलेगा कणों से।
अभी ग्रहन कर रहा है
सूरज से यह ताप लगता है।
........ मिलाप सिंह भरमौरी
अपने ही नजरिए से
हर बात सोचने लगते हैं।
थोडी सी क्या हरकत हुई
जोर से भौंकने लगते हैं।
दूसरे की भी सुननी चाहिए
उसकी भी मजबूरी हो सकती है।
आज संयम जरा भी रहा नहीं
तुरंत कोसने लगते हैें।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
मुस्कुरा लेते हैं दर्द में
गम से धौखा कर लेते हैं।
छोड कर झगडा कोशिसों से
किस्मत से समझौता कर लेते हैं।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
जिनको नहीं कुछ करना आता।
उनको है बस जलना आता।
जो लोग अपने काम में व्यस्त हैं।
वही तो इस दुनिया में मस्त हैं ।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
किस तरफ हैें निशाने हमने देखे है।
मत झूठ बोल हमनें भी आईने देखे हैं।
जो कहतेेे हैं बहुत शरीफ खुद को यहां,
उनके भी बहुत हमने कारनामें देखे हैं।
....... मिलाप सिंह भरमौरी
बेशक घूंघट में रहती है हमेशा,
फिर भी पतित चरित्र पर शक करते हैं ।
ई वी एम दे रही है जो आज सबके सामने,
उसे अग्नि परिक्षा ही तो कहते हैं।
........ मिलाप सिंह भरमौरी