भूल कर सब मसले पलभर
आओ आज अमीर बन जाते हैं।
अगर वजह नहीं है कोई भी तो
चलो बेवजह ही मुस्कुराते हैं।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
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भूल कर सब मसले पलभर
आओ आज अमीर बन जाते हैं।
अगर वजह नहीं है कोई भी तो
चलो बेवजह ही मुस्कुराते हैं।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
नदी किनारे शाम को
जब दिन ढ़लता है।
सूरज धीरे- धीरे
पानी के बीच उतरता है।
ताजा हो जाती हैं फिर
भीगी सी यादें।
एक तूफान सा जैसे
आँखों के बीच उमड़ता है।
........ मिलाप सिंह भरमौरी
चारों ओर दिवारे हैं ।
कुछ लम्हें मीठे खारे हैं।
उलझ गया है किस उलझन में
पतझड के बाद बहारें हैं।
जीत हुई है उनकी अक्कसर
जो कई मर्तवा हारे हैं।
रहता नहीं अँधियारा हमेशा
हर रात के बाद उजियारे हैं।
इक लगन बनेगी सबल जीत की
बाकि सब झूठे लारे है।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
मुस्कुरा लेते हैं दर्द में
गम से धौखा कर लेते हैं।
छोड कर झगडा कोशिसों से
किस्मत से समझौता कर लेते हैं।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
यह जो हुस्न जवानी है
यह बहता हुआ पानी है
आज दौर है खुशियों का
कल वक्त तूफानी है
इस वक्त के पहिए से
सबको ही गुजरना है
यही सबकी हकीकत है
यही सबकी कहानी है
---- मिलाप सिंह भरमौरी
आज किस डे है
सोचता हूँ किस को करूं
हर तरफ चर्चा है
क्यों मैं भी पीछे रहूं।
बडी मशक्कत के बाद
ज्ञान के द्वार खुले हैं
जिन्हें किस कर सकूं
हकदार मिले हैं।
एक किस उनके लिए
जिन्होंने यह दुनिया दिखाई है
अपनी खुशियां कुर्बान कर
हमारी काबिल जिंदगी बनाई है।
एक किस उसके लिए
जो सब रिश्ते तोडकर
मेरे पास आई है
सजाकर घर की दीवारों को
जिंदगी महकाई है।
एक किस उनके लिए
जो सबसे हमको प्यारे हैं
जिस तरह हम थे किसी के
वो बच्चे हमारे हैं।
----- मिलाप सिंह भरमौरी
स्वाईन फ्लू बहुत तेजी से फैल रहा है
खुद को और लोगों को इससे बचाएँ ।
अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में
कुछ आसान से ये नुस्खे अपनाएं ।
हाथ मिलाने से बचें दोस्तों में
नमस्कार से ही कुछ दिन काम चलाएं ।
जब भी जाना हो भीड - भाड में
मुंह को मास्क से ढक कर ही जाएं ।
अगर जुकाम बुखार की शिकायत हो तो
नजदीकी डाक्टर को जरूर दिखाएं ।
------मिलाप सिंह भरमौरी
मरीज के मरने के बाद आ रही
लिए हुए सैंपल की रिपोर्ट
ऐसे में यह सुस्त प्रशासन
कैसे स्वाईन फ्लू को पाएगा रोक
जल्दी जल्दी जगह जगह पर
फ्लू टैस्ट के लिए लैब बनाओ
महामारी बन चुकी इस बिमारी से
सभी लोगों को शीघ्र बचाओ
----- मिलाप सिंह भरमौरी
सफलता ओर कुछ नहीं है
यह बस इक चाह होती है
चलना होता है उस पर अविराम
सामने जो राह होती है
कदमों को चूमता है फिर
दिल्ली का नूरानी तख्त भी
और गली गली में हरसूं
उस चाहत की वाह ! वाह होती है
----- मिलाप सिंह भरमौरी
जब वो रूठ जाती है
जैसे किस्मत लूट जाती है
लहलहाते हुए शजर से
जैसे टहनी टूट जाती है
जब कम करके वो शिकन को
हिलाती है कमान पलकों की
फिर मिलती है जन्नत राहत की
फिर बचती है जान सांसो की
----- मिलाप सिंह भरमौरी
मत बनो इतना भी
अजनबी कि
उम्मीद का चिराग भी
बुझा दें हम
थाम रखा है मुश्किल से
चूर चूर दिल यह
कि शन से जमीन पर
इसे गिरा दें हम
तुम्हें नहीं पता
क्या हो तुम हमारे लिए
हर चीज से बढकर हो
तुम हमारे लिए
बस एक बार
मिल जाओ तुम हमें जो तो
फिर न मांगेंगे कुछ भी
तेरी कसम खुदा से हम
---- मिलाप सिंह भरमौरी
जिंदगी इतनी बेकार
कभी नहीं होती है
कि खुद को ही मिटा दिया जाए ।
सौ बहाने निकल आते हैं जीने के लिए
अगर बस एक पल पर
काबू पा लिया जाए ।
खुद से बाहर निकल
कर दायरा सोच का बडा
अगर अपने लिए ठीक नहीं
तो क्यों न ओरों के लिए जिया जाए ।
----- मिलाप सिंह भरमौरी
सर्दी के दिन है सर्दी की रातें
हो रही हैं कोहरीली बरसातें
जम चुकी है स्याही कलम की
लिखें कैसे अब दिल की बातें
बेघर फुटपाथ पे ठिठुर रहे हैं
खो रहे हैं वो अब अपनी जानें
पूंजीपति को फर्क क्या इससे
हो रही उसकी रंगीन नित रातें
सबके पास हो बुनियादी चीजें
कोई समाज में समानता ला दे
----- मिलाप सिंह भरमौरी
हर पल तन्हा रहना ठीक नहीं है
जरा लोगों से भी कुछ मिला करो
क्यों मुरझाए मुरझाए रहते हो
कभी फूल बन कर भी खिला करो
गर तारीफ किसी की मुमकिन नहीं
तो अगल बगल में तुम गिला करो
पर ये तेरा तन्हा रहना ठीक नहीं है
जरा लोगों से कुछ मिला करो
------ मिलाप सिंह भरमौरी
देश के जो काम न आए
लानत है ऐसी जवानी को
कभी न भूल पाएगा देश
तेरी इस कुर्बानी को
अपनी जान की बाजी लगाकर
घाटी में अमन की रक्षा की है
तेरी बहादुरी कर देगी खत्म
देश से आतंक की कहानी को
------- मिलाप सिंह भरमौरी
हाल अपने दिल का
मैं तुम्हें सुना नहीं पाता हूँ
जो सोचता रहता हूँ हरपल
होंठो तक ला नहीं पाता हूँ
बेशक बहुत मोहब्बत है
तुम्हारे लिए मेरे इस दिल में
पर पता नहीं क्यों तुमको
फिर भी मैं बता नहीं पाता हूँ
----- मिलाप सिंह भरमौरी
Hindi shayari
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हर पल मन में इक फिक्र रहता है
और जुवां पर उसका जिक्र रहता है
जब हो जाता है प्यार किसी को
कुछ इस तरह का उसका हश्र रहता है
---------- मिलाप सिंह
खुदगरजों से मोहब्बत कैसी
खुदगर्ज तो अपनी ही सोचेंगे
अगर इससे हो मुनाफा इनका
तो तुझे मरने से भी क्यों रोकेंगे
सुन तेरी मोहब्बत का उन्हें
जरा भी एहसास नहीं होगा
वो तो सिर्फ मूर्ख कहेंगे तुमको
और खिलखिला कर ताली ठोकेंगे
------ मिलाप सिंह भरमौरी
मौहब्बत जब हो जाती है तो
उसके सारे अवगुण छुप जाते हैं
चाहे हो वो कोई घोर दरिंदा
उसमें भी फिर रव को पाते हैं
मर मिटने को हो जाते हैं आमअदा
बस उसके एक इशारे पर
छिटक के खुद पर इश्क का तेल
प्यार की चिंगारी से जल जाते हैं
--------- मिलाप सिंह भरमौरी
मौसम बदल रहा है
जरा अपना ख्याल रखना
सुबह सर्दी बहुत होती है
तन को कपडों से ढक के रखना
क्योंकि कभी भी टपक सकती है
कमबख्त नाक यह
इसलिए हरपल जेब में
दोस्त रूमाल रखना
----- मिलाप सिंह भरमौरी