तेरी यादें मुझसे कुछ कहती हैं
तू अभी भी मेरे दिल में रहती है
वो जमाना फिर उमड के आता है
तू आंखों से फिर कुछ कहती है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
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तेरी यादें मुझसे कुछ कहती हैं
तू अभी भी मेरे दिल में रहती है
वो जमाना फिर उमड के आता है
तू आंखों से फिर कुछ कहती है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
मोहब्बत इनायत बफा की उम्मीदें
सभी की सभी है अधूरी उम्मीदें
मालूम नहीं है पूरी हो के न हो
पर जीने के लिए हैं जरूरी उम्मीदें
--------- मिलाप सिंह भरमौरी
दर्द दिल के मैं सहूंगा कैसे
बिन तेरे तन्हा मैं रहूँगा कैसे
इसमें भी होगी तेरी रुसवाई
पता तेरा किसी से पूछूंगा कैसे
------- मिलाप सिंह भरमौरी
दादा ने दी दान में
और एक गरीब हो गया आबाद
पोते के मन में भर गया लालच
उजाडने को
कोर्ट कचहरी की छान रहा खाक
कल और आज
का फर्क देख कर
भगवान भी हो गया हैरान
---- मिलाप सिंह भरमौरी
अच्छाई की ही जीत होती है
चाहे कितनी भी हो सबल बुराई
रावण का वध तो तय ही था
अधर्म की राह थी उसने अपनाई
श्री राम चंद्र को याद करते हुए
सभी को हो आज दशहरे की बधाई
------ मिलाप सिंह भरमौरी
पेड की छाया में
पत्थर पर बैठकर
बहुत अच्छी लगती है
मक्की की सरसराहट
आत्मा का जैसे
हो परमात्मा से मिलन
जीवन में आती है
जैसे सकून की आहट
------ मिलाप सिंह भरमौरी
हाथ मुँह धोने से नहीं काम चलेगा
करना होगा अब पूरा सनान
साफ सफाई का हर क्षेत्र में
रखना होगा सबको विषेश ध्यान
सुधर जाओ अब अलसी लोगों
तुम्हारी तो अब खैर नहीं हैं
क्योंकि शुरू हो गया है आज से
देश में स्वच्छ भारत अभियान
------- मिलाप सिंह भरमौरी