तन से पसीने का
दरिया बहने लगता है
जब भी बिजली का
कट लगता है
उसको तो हर सहूलत
मयस्सर है
वो कहाँ दर्द हमारा
समझता है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
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तन से पसीने का
दरिया बहने लगता है
जब भी बिजली का
कट लगता है
उसको तो हर सहूलत
मयस्सर है
वो कहाँ दर्द हमारा
समझता है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
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Hindi shayari
रात भर बादल गरजते बरसते रहे
हम तन्हा दिवारों में तरसते रहे
कोई लेकर न आया शबनम की बूंदें
हम प्यासे के प्यासे तडफते रहे
और करते भी क्या लाचारी में हम
बस बर्बादी पे अपनी हम हंसते रहे
-------- मिलाप सिंह भरमौरी
Hindi shayari
देखता रह जाता हूँ मैं
बस तेरे चेहरे को
इस दुनिया की हकीकत को
और खुदा के राज गहरे को
इस तरह होती है हलचल
दिल में तेरे आने से
कि जैसे ने हिला दिया हो कंकर से
किसी ने ठहरे पानी को
------ मिलाप सिंह भरमौरी
बेवजह गमगीन बना लेते हैं
जिंदगी को लोग
वरना यह दुनिया तो बडी
खूबसूरत है
फिर हर शय में खुशी दिखाई
देगी तुम्हें
बस अपना नजरिया ही तो
बदलने की जरूरत है
------- मिलाप सिंह भरमौरी
Hindi shayari
जिस दिन तुमसे न बात हो
यह दिल उदास हो जा ता है
बहुत दूर निकल चुका गम
फिर से पास हो जाता है
अजीब सकून मिलता है फिर
बस इक तेरे करीब होने से
तेरी दो चार बातों से ही मुझे
जन्नत का एहसास हो जाता है
--------- मिलाप सिंह भरमौरी
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Hindi shayari
तेरी हर एक अदा अब
इस दिल को प्यारी लगती है
यह झुकी हुई नजर भी तेरी
कितना कुछ मुझसे कहती है
खामोश लबों के लफ्जों को भी
यह दिल झट से पढ लेता है
इस जिस्म की रग रग में अब
तेरे प्यार की नदिया बहती है
--------- मिलाप सिंह भरमौरी
Hindi shayari
खो कर तेरी आँखों में
मैं सब कुछ भूल जाता हूँ ।
तू साथ हो तो जैसे
जन्नत में मैं घूम आता हूँ ।
कुछ नहीं मय मयखाना
शराब तेरे आगे अब ।
मैं तो बस तेरे होठों की
शबनम से झूम जाता हूँ ।
------ मिलाप सिंह भरमौरी