milap singh

milap singh

Sunday, 10 September 2023

बायोमैट्रिक


कमी मुझमें है तो
मुझको सुधारो।
कमी नियत में है तो
खुद को सुधारो।
मैं विकसित भारत का सपना देख रही हूं 
यूं मुझको न नकारो।

मैं कई वर्षों से टंगी हूं खूंटे पे
मुझे अपना फर्ज निभाने दो।
भूल न जाऊं काम अपना
मुझे अब हाजरी लगाने दो।

मैं मशीन हूं इंसान नहीं
मुफ्त की सेलरी मेरी फितरत नहीं।
मुझ को इक आशा से बनाया गया है
मुझे काम के लिए लगाया गया है।

बहुत देर हुई अब तो चला दो।
अगर डर लगता है हंगामे से तो
फोर्स मंगवा लो।

पर यह डर बेवजह है
यह भारत के लोग हैं
जागरूक, करुणामय और अनुशासित
दुनिया में कहीं भी अन्याय हो जाए तो 
ये ज्ञापन जरूर देते हैं। 
मशाल मार्च,धरना जरूर देते हैं।
तो फिर बायोमेट्रिक मशीन के साथ
अन्याय कैसे।

मैं भी अनुशासन को परखती हूं
तो यह मेरे दुश्मन कैसे हो सकते हैं।
डाल कर पर्दा मुझपर
मुझे कैसे घोंट सकते हैं।
जरूर यह पर्दा रस्म निभाने के लिए होगा।
जरूर रिबन काटेंगे उद्घाटन पर
नारियल फोड़ेंगे,
मिठाई बांट कर तालियों की आवाज़ में,
पर्दा हटाएंगे मेरे ऊपर से।







Saturday, 3 June 2023

लचीला

रुख जिंदगी का अपना 
कुछ लचीला रख ।
स्वभाव अपना कुछ सूखा 
तो कुछ गीला रख।
क्योंकि जिंदगी एक ही मिलती है 
जीने के लिए।
इसलिए सिर्फ दुश्मनी का ही 
दरवाजा मत ढीला रख।

मिलाप सिंह भरमौरी।

Sunday, 28 May 2023

सरकारी भूमि हूं

नजर गड़ाए फिरते हैं
ललचाए ललचाए फिरते हैं 
दिन रात षड्यंत्र रचाते हैं
मैं कैसे अपना अस्तित्व बचाऊं
अपनो का प्यार भूली हूं।
मैं सरकारी भूमि हूं।

चरागाह पर हो गए कब्जे
जंगल को तो सूखे निगले।
आंगन अपना कर लिया चौड़ा
शमशान घाट को भी न छोड़ा।
मैं वोट की खातिर सूनी हूं
मैं सरकारी भूमि हूं।

सरकारी रास्ते के खो गए पत्थर
बचपन में हम चलते थे जिन पर
कुएं पुराने भी नजरों में है
सड़क के आधे से कम हो गए मीटर
मैं रख रखाब से छूटी हूं
मैं सरकारी भूमि हूं।

........मिलाप सिंह भरमौरी।




पल पल

पल- पल  में    जो  डंसता  है।
वो  मन की  एक  अवस्था है।

जो समझ गया इस नुक्ते को
वह  सदा  खुशी  में रहता है।

अनजानेपन का लिहाफ उतारो
समझ  में  संयम  रहता  है।

सीखना है तो ईलम को सीखो 
सिर्फ ईर्षा से क्या बनता है ।

दौलत शोहरत क्या कर लेगी
जब भीतर आग सा जलता है।

   ....... मिलाप सिंह भरमौरी 




Sunday, 7 May 2023

शब्द


शब्द

शब्दों से  प्यार  करो।
शब्दों का सत्कार करो।

शब्द बनाए बिगड़े काम
शब्द बिगाड़े बनते काम
शब्दों की पहचान करो।

शब्द  दिलाते  मीठी  याद
शब्द  दिलाते  तीखी याद
शब्दों की न तीखी धार करो।

शब्द दिलाए तख्तोताज
शब्द छुड़ाए चलता राज
शब्दों से न बैर करो।

.......मिलाप सिंह भरमौरी।

Thursday, 20 April 2023

इंतजार


छोटी छोटी बातों पर भी
हो जाते हैं आग बबूले।

इस अमृत तुल्य जिह्वा से
फैंकते फिरते तीखी सूलें।

इंतजार को गाली देते
खुद को ही बस सच्चा कहते।

भाई अपनी भी तो हो सकती हैं 
पर गलती खुद की कौन कबूले।

.....मिलाप सिंह भरमौरी।

Sunday, 29 May 2022

पता ठिकाना

पूछ रहा है पता ठिकाना
जरूर मुसाफिर बन जायेगा।

चलते चलते दुनिया की
सब रस्मों से बाकिफ बन जायेगा।

खुशियां रहती किस नगरी में
और कांटे चुभते हैं कहां कहां।

मीठी बातों में छुपी हकीकत भी
धीरे धीरे समझ जायेगा।

......मिलाप सिंह भरमौरी