milap singh

milap singh

Thursday, 24 September 2020

अनजान

यूं तो हर बात तेरी
हम समझ जाते हैं।

कब करते हैं इशारा आंखो से
कब चेहरा बनाते हैं।

बस मिलता रहे सकून तुम्हें
तेरी होशियारी का।

इसलिए खुद को हम
अनजान - सा दिखाते हैं।

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 6 March 2020

घुटन

बेवजह नहीं थी ' अक्स'
घुटन - सी सांसों की।
हवा में जहर घुल रहा है
जरा सांस सम्भल के ले।

मिलाप

Thursday, 9 January 2020

फर्ज



उस भूमि को नमन करो

जिस पर हमने जन्म लिया है।

उस धरती को माथे से चूमो

जिसने हमको कर्म दिया है।

बड़ी बड़ी बातें हैं यह सब

और मौके पर ऐरे गैरे भी कह देते हैं

बात मगर इतनी सी है

क्या निष्ठा से तुमने अपना अदा फर्ज किया है।

...मिलाप सिंह भरमौरी 


Wednesday, 8 January 2020

अटल



वो गफलत में है जो कहते हैं।

हम अटल खड़े हैं अटल रहेंगे।

देखना इक दिन लहराने वाले

बनकर पत्ते सड़कों पे झड़ेंगे।

जब कुचले जाएगें पैरों- तले

चर -चर की सी आवाज करेंगे।

वो सबको आँखे दिखाने वाले

कदमों की जरा आहट से डरेंगे।

तुम ये कैसी बातें करते हो जी

जब वो न रहे तो हम क्या रहेगें।

..... मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 11 December 2019

हराम

इंसान पहले  काम ढूंढता है
फिर  आराम  ढूंढता है
फिर  देखता है अगल- बगल
और हराम ढूंढता है।

....... मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 23 November 2019

सफर



खाली नहीं है हम जी 

हम भी काम करते हैं।

पलकों के चौराहे पे

सपनों की दुकान करते हैं।

बेसफ़र के पाँव में तो

कभी शाले नहीं होते

यह उनकी है कमी जो

मंजिल को सलाम करते हैं।

मिलाप सिंह भरमौरी





Wednesday, 20 November 2019

खाव

तलाश जारी है मगर गुम क्या है।

कुछ खोया है हरपल भ्रम - सा है।

अधूरा ही रह गया लफ्ज़ ज्यादा यहां


हर कोई कहता अभी कम - सा है।

यह भीड़ इतनी क्यों लगती है अजनबी


जब पता है हर ज़र्रा तुम - सा है।

बदल जाता है कब यह पता नहीं चलता


खाव कितना जहां में नरम - सा है।

      ~मिलाप सिंह भरमौरी~