milap singh

milap singh

Tuesday, 11 December 2012

मुझसे खफा तू जनाब रहती है





 मुझसे खफा तू जनाब रहती है




किस लिए मुझसे खफा तू जनाब रहती है
मै नही कहता कुछ भी शराब कहती है

मै तो सरसार मुझे होश कहाँ होता है
तू भी क्यों मुझसे फिर हिजाब रखती है

आज ऐसा किया कल ऐसा किया था तूने
तू तो गलती गलती का हिसाब रखती है

कितने ही टूट गये होते नौजबान यहाँ 
एक शराब है जो टूटों को आबाद रखती है

मै तो मदहोश होता हूँ मुझे न रोका करो
तू तो मदहोशी में भी इताब करती है 


मिलाप सिंह 

Monday, 10 December 2012

कितने खुदगर्ज ये



कितने खुदगर्ज ये


कितने खुदगर्ज ये दुनिया वाले है
फरेब का अक्स ये दुनिया वाले है

जगह मुक्कदस और जहन फरेबी
मतलबी प्यार ये दुनिया वाले है

किसी को तडफता देख हंसते है
कितने संगदिल ये दुनिया वाले है

मेरा मेरी और ये धन -दौलत बस
भ्रम में भटकते ये दुनिया वाले है

अपना रुतवा ,रोटी ,और जगह के लिए
खून के प्यासे ये दुनिया वाले है

सर झुका 'अक्स' खुदा के दर पे ही
खुद भिखारी ये दुनिया वाले है


milap singh

Friday, 7 December 2012

dard dil ke mere



दर्द दिल के मेरे


दर्द दिल के मेरे जब से कम हो गये
दुनिया की भीड़ में फिर से गुम हो गये

पहले खुद को जर्रा समझता था मै
दिन क्या बदले फिर से हम हो गये

फिर से हुस्न पर निखार आने लगा
शबनमी होंठ फिर से नम हो गये

फिर से जिन्दगी की तरफ देखने लगे
मर मिटने के खाब बरहम हो गये

फिर से खोने लगा दिल रंगीनियों में
हर हसीन चेहरे अपने सनम हो गये


मिलाप सिंह

Thursday, 6 December 2012

ham se na dhoka kro


 हमसे न धोका करो


यूँ हमसे न धोका करो
तुम इतना न सोचा करो

कदम तो बढते है मेरी तरफ
तुम जबरन न रोका करो

समा भी तो है मेरी जानिब
तुम बेकार न मौका करो

जुबान को कहने दो दिल की 'अक्स' 
तुम इसको न रोका करो


milap singh

Wednesday, 5 December 2012

abhi abhi pi hai


अभी अभी पी है शराब


अभी अभी पी है शराब नशा उतरने दे
फिर करूंगा तुमसे बात नशा उतरने दे 

दिल आश्काना है और फिर ये मदहोशी 
फिर न कहना कुछ जनाब नशा उतरने दे

मुक्तसर आवेश है ये कोई मुसल्ल नही
बदल जायेंगे तेरे जज्बात नशा उतरने दे

गम के अंधेरों से तो निकल जाउं मै
फिर पकड़ना मेरा हाथ नशा उतरने दे 



milap singh

Tuesday, 4 December 2012

aansuon ko rok kar


                  

                        आंसुओं को रोक कर 



क्या मिला है आपको आंसुओं को रोक कर
कर ली खराब जिन्दगी बेसबव सोच कर

कितने ही हो चुके बर्बाद सोच सोच में
अब भी कुछ वक्त है अब भी कुछ गौर कर

गये हुए वक्त को बार बार सोचना क्या
जीना हो जहाँ में तो जिओ दिल खोलकर 

मेरे लिए जो गलत है तेरे लिए वो ठीक है
गलत ठीक का न तू हर घड़ी मापतोल कर

ये दिल है शीसे का दरार तो रहेगी ही
कितने दिन जिओगे दिल के पुर्जे जोडकर

आपकी ही बात नही हमने भी धोखे खाए है
जिसे भी मेने दिल दीया चले गये तोडकर


milap singh

Sunday, 2 December 2012

tanhaion ke pal


तनहाईय़ौं के पल


बन के इक आस नई दिल पे छा जाते है
भूले बिसरे लम्हे जब याद आ जाते है

मुझको होती है तुमसे मिलने की खवाइश 
जब तेरे प्यार के पल सपनों में आ जाते है

फिर से जीने की तमन्ना करता है दिल
जब तेरे हुस्न के जलबे झलक दिखा जाते है

फिर से मंजिल की तरफ बनता है रुख 
फिर कई मकसद जहन में मेरे आ जाते है

प्यार जिन्दगी में बड़ा जरूरी है 'मिलाप'
वरन तनहाईय़ौं के पल जिन्दगी खा जाते है 



milap singh