milap singh

milap singh

Thursday, 9 August 2018

नजरें

बच के निकलता हूँ

तेरी गली से

कि फिर तुमसे 

सामना न हो जाए।

बड़ी मुश्किल से

समेटे हैं दिल के टुकड़े

कि फिर वही 

मामला न हो जाए।

बहुत डरता हूँ तेरी

झुकी सी पलकों से

असर बहुत है

तेरी शोख़ नजरों में।

जानलेवा है बहुत

यह बेरुखी तेरी

दर्द सीने में वो फिर

वेवजह न हो जाए।

....... मिलाप सिंह भरमौरी

याद

नदी किनारे शाम को

जब दिन ढ़लता है।

सूरज धीरे- धीरे

पानी के बीच उतरता है।

ताजा हो जाती हैं फिर

भीगी सी यादें।

एक तूफान सा जैसे

आँखों के बीच उमड़ता है।

........ मिलाप सिंह भरमौरी


Tuesday, 24 July 2018

दूरियां

दूरियां बना देती हैं
मीलों की दरमियाँ
बड़ी बतमीज होती हैं
यह गलतफहमियां

Monday, 2 July 2018

बैठी हुई आँखे हैं

बैठी हुई आँखें हैं

और सूखे हुए गाल।

कुछ ठीक नहीं लगता 

तुम्हारा ये हाल।

जहर बन जाएगा

जो दिल में छुपा रखा है।

तू बाहर बहने दे आंसू

गम अपना निकल।

....... मिलाप सिंह भरमौरी



Tuesday, 3 April 2018

Badnam shayari


Badnan shayari

अच्छा नहीं है ये काम न करो।

बेटी किसी की यारो बदनाम न करो।

दफ़न करो बातें मिट्टी डालकर ।

ये बेआबरू की बातें तुम आम न करो।

....... मिलाप सिंह भरमौरी


Sunday, 1 April 2018

अवसर

यहां तु ही नहीं अकेला है 


कहना ओर भी कई मोड चुके हैं।

अपने किए हुए वादे महफ़िल में 


हजार तोड चुके हैं।

सुना है तरक्की बहुत पा रहें हैं 

वो आज उसी पेशे में।



जो कहते थे सबकी खातिर 


पेशा ही अपना हम छोड़ चुके हैं।

     ...... मिलाप सिंह भरमौरी