चेहरा ऐसा रखो कि
खुद को भी हो जाए भरम
खुशनुमा खुशनुमा
हर तरफ सब आए नजर
खुद मिट जाऐंगे फिर
देखना दाग गम के सभी
दर्द हो जाएगें तेरे
सब के सब फिर दफन
------ मिलाप सिंह भरमौरी
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चेहरा ऐसा रखो कि
खुद को भी हो जाए भरम
खुशनुमा खुशनुमा
हर तरफ सब आए नजर
खुद मिट जाऐंगे फिर
देखना दाग गम के सभी
दर्द हो जाएगें तेरे
सब के सब फिर दफन
------ मिलाप सिंह भरमौरी
बहुत गहरा है इश्क का समुंदर
इसमें खोने पाने का कोई सवाल नहीं रहता
महबूब की तो नख शिख की खबर होती है
मगर अपना कुछ भी ख्याल नहीं रहता
नरम हो जाते हैं फिर कठोर दिल वाले भी
चेहरे पर वो नफरत वो उबाल नहीं रहता
---------- मिलाप सिंह भरमौरी
गम न मिले कभी कोई तुम्हें
खुशियाँ तुम्हें हजार मिले
कभी कदमों को तेरे ठोकर न लगे
कामयाबी तुम्हें बेशुमार मिले
सामना न हो कभी खिजाओं से तेरा
हर पल हर कदम पर बहार मिले
---- मिलाप सिंह भरमौरी
यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है
बडे बडे अक्षरों में शब्द हर बस में लिखे होते है
पर गोद में बच्चे लेकर खडी होती है महिलाएं
और तगडे मुच्छटंडे सीट पर आराम से बैठे होते है
यह सच है कि मांगने से नही मिलते हैं हक कभी भी
यह तो खुद शेर के जबडे से निकाल कर छीनने होते हैं
-------- मिलाप सिंह भरमौरी
तेरी यादें मुझसे कुछ कहती हैं
तू अभी भी मेरे दिल में रहती है
वो जमाना फिर उमड के आता है
तू आंखों से फिर कुछ कहती है
------ मिलाप सिंह भरमौरी
मोहब्बत इनायत बफा की उम्मीदें
सभी की सभी है अधूरी उम्मीदें
मालूम नहीं है पूरी हो के न हो
पर जीने के लिए हैं जरूरी उम्मीदें
--------- मिलाप सिंह भरमौरी
दर्द दिल के मैं सहूंगा कैसे
बिन तेरे तन्हा मैं रहूँगा कैसे
इसमें भी होगी तेरी रुसवाई
पता तेरा किसी से पूछूंगा कैसे
------- मिलाप सिंह भरमौरी