milap singh

milap singh

Monday, 13 October 2014

Ho jaye bharam


चेहरा ऐसा रखो कि
खुद को भी हो जाए भरम

खुशनुमा खुशनुमा
हर तरफ सब आए नजर

खुद मिट जाऐंगे फिर
देखना दाग गम के सभी

दर्द हो जाएगें तेरे
सब के सब फिर दफन

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 7 October 2014

बहुत गहरा है इश्क

बहुत गहरा है इश्क का समुंदर
इसमें खोने पाने का कोई सवाल नहीं रहता

महबूब की तो नख शिख की खबर होती है
मगर अपना कुछ भी ख्याल नहीं रहता

नरम हो जाते हैं फिर कठोर दिल वाले भी
चेहरे पर वो नफरत वो उबाल नहीं रहता

---------- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 6 October 2014

गम न मिले


गम न मिले कभी कोई तुम्हें
खुशियाँ तुम्हें हजार मिले

कभी कदमों को तेरे ठोकर न लगे
कामयाबी तुम्हें बेशुमार मिले

सामना न हो कभी खिजाओं से तेरा
हर पल हर कदम पर बहार मिले

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 5 October 2014

महिलाओं के लिए आरक्षित

यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है
बडे बडे अक्षरों में शब्द हर बस में लिखे होते है
पर गोद में बच्चे लेकर खडी होती है महिलाएं
और तगडे मुच्छटंडे सीट पर आराम से बैठे होते है
यह सच है कि मांगने से नही मिलते हैं हक कभी भी
यह तो  खुद शेर के जबडे से निकाल कर छीनने होते  हैं

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

तेरी यादें


तेरी यादें  मुझसे  कुछ कहती हैं
तू  अभी भी मेरे दिल में  रहती है
वो जमाना फिर उमड के आता है
तू  आंखों से  फिर कुछ  कहती है

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 4 October 2014

जरूरी उम्मीदें


मोहब्बत इनायत बफा की उम्मीदें
सभी  की सभी  है अधूरी  उम्मीदें
मालूम  नहीं  है  पूरी  हो  के  न हो
पर जीने के लिए हैं जरूरी उम्मीदें

--------- मिलाप सिंह भरमौरी

दर्द दिल के


दर्द  दिल के  मैं  सहूंगा  कैसे
बिन तेरे  तन्हा मैं रहूँगा  कैसे
इसमें भी  होगी तेरी रुसवाई
पता तेरा किसी से पूछूंगा कैसे

------- मिलाप सिंह भरमौरी