आकाश खुला है
ऊडान भरो
पर इस धरती से भी
जुड़े रहो
क्योंकि इक दिन
उड़ते -उड़ते थक जायंगे
ये कामयाबी के पर
कट जायंगे
या वक्त का धागा
क्षीण हो जायेगा
तब ये धरती ही काम आएगी
अपनी ममतामयी गोदी में
हमे सुलायेगी
Milap Singh Bharmouri
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