milap singh

milap singh

Thursday, 14 February 2013

आकाश खुला है




आकाश खुला है 
ऊडान भरो
पर इस धरती से भी 
जुड़े रहो 
क्योंकि इक दिन 
उड़ते -उड़ते थक जायंगे
ये कामयाबी के पर 
कट जायंगे 
या वक्त का धागा 
क्षीण हो जायेगा 
तब ये धरती ही काम आएगी
अपनी ममतामयी गोदी में 
हमे सुलायेगी



Milap Singh Bharmouri

Tuesday, 12 February 2013

Kiss day

कभी kiss डे
कभी rose डे
हम क्या थे
और क्या हो गए

pahadi bhajan


मेरा बेडा भी पार लगायो 
तुसी तारे ने पत्थर भी राम जी

लोक ता लांदे ने जग ते लंगर 
मुट्ठी नई नाजे दी मेरे अंदर
घर मेरे भी भोग लगायो 
तुसी तारे ने गरीब भी राम जी


मेरा बेडा भी पार लगायो 
तुसी तारे ने पत्थर भी राम जी



लोक ता जांदे ने मंदर-द्वारे 
किराया नी जेब म़ा,रूपया मेरे
कदी मुंजो भी दर्श दिखायो 
तुसी तारे ने गरीब भी राम जी


मेरा बेडा भी पार लगायो 
तुसी तारे ने पत्थर भी राम जी


लोक चढांदे ने सोना ते चांदी
मेरे ता हिरदे म़ा बस श्रधा ही आंदी
मेरी श्रधा रा मुल भी जी पायो 
तुसी तारे ने पत्थर भी राम जी


मेरा बेडा भी पार लगायो 
तुसी तारे ने पत्थर भी राम जी



मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 10 January 2013

सोचते-सोचते उहीं




सोचते-सोचते उहीं दिन गुजर जायेगा
दिन गुजर गया तो नही फिर आयगा

सम्भाल के रखो इस वक्त के आईने को
कुछ न हाथ आएगा गर बिखर जायेगा

हश्र क्या हो नराजगी से पता नही पर
रहम से उसके हाँ जीवन संबर जायेगा

एहतियात में बुराई क्या 'अक्स' अगर
जरा- सी गौर से कुछ निखर जायेगा


मिलाप सिंह



Monday, 7 January 2013

उसने पत्थर को पूजा खुदा पा लिया





उसने पत्थर को पूजा खुदा पा लिया 
हमने इन्सान को पूजा धोखा मिला

दिल के आईने में मुड़ के जो देखा
अक्स उसमे 'मिलाप' अपना रोता मिला

मुफलिसी ने उसे घेर रखा था ऐसे
हर मोड़ पर बोझ बेचारा ढ़ोता मिला

अजीब अजनबी थी वो विरान जगह
मुक्कदर मेरा मुझे जहाँ सोता मिला

कुछ ऐसा आलम था तेरे शहर का
हर गली मोड़ पर खड़ा धोखा मिला


मिलाप सिंह

Thursday, 3 January 2013

आप आयें तो





आप आयें तो हवाओं में लहर होती है
घटा बरसती है धरती पे महर होती है

कितनी मौजों को मेरे संग कर देते है
फीकी तस्बीर में प्यारे रंग भर देते है
आपके बिन जिन्दगी अधूरी होती है

दुनिया में बस अँधेरा ही अँधेरा है
दीखता तो कुछ नही कहने को सबेरा है
आप आयें तो मेरी भी सहर होती है

फूल -पत्ते -कलिय़ां खिल जाती है
खोई हुई खुशिया सब मिल जाती है
देखने वाली 'मिलाप' ये दहर होती है


मिलाप सिंह 

Tuesday, 1 January 2013

यह सांसे युहीं चलती नहीं




यह सांसे युहीं चलती नहीं 
चलाने वाला जरुर है कहीं

उसका वजूद जरुर है सच
कहते भी है 'मिलाप' कई

अगर उसको झूठ कहते है
तजुरबे में होगी कहीं कमी

हमको तो वो ही दिखता है
चाहे देखें फलक या जमीन

शायद वो हो आस-पास ही
देखो तुम इधर-उधर अभी


मिलाप सिंह