दीपक जले मुंडेर पर
बंटने लगी मिठाइयां
सभी दोस्तों को हमारी ओर से
दिवाली की बधाईयाँ
------ मिलाप सिंह भरमौरी
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दीपक जले मुंडेर पर
बंटने लगी मिठाइयां
सभी दोस्तों को हमारी ओर से
दिवाली की बधाईयाँ
------ मिलाप सिंह भरमौरी
तेरी खुशबू छुपी है हवाओं में
आओ झूमें मस्त फिजाओं में
आज लगता है इतना रंगीन जो समां
तेरे होठों को छू कर आई है हवा
मैं भी रंग जाऊं आओ बाहों में
------- मिलाप सिंह भरमौरी
छोटी छोटी बातों पर जब
जोर से खुलकर रो लेते थे
बचपन के वो दिन
बहुत ही सुंदर होते थे
अपने पराये का पता नहीं था
सब कुछ न्यारा लगता था
चांद सितारों पर चलने के
जब सुंदर सपने बोते थे
------ मिलाप सिंह भरमौरी
बचपन में सपने भी
कितने सुन्दर आते थे
आसमान में बिन पंखों के
खुद को उडते पाते थे
थोडे से जब बडे हुए
स्कूल कालेज को जाने लगे
फिर सपनों में भी सुंदर सुंदर
हसीन चेहरे आने लगे
जब बुढापे में पहुंच गए
तो सपने भी डराने लगे
मरे हुए लोगों से फिर
शमशान घाट पर बतियाने लगे
------- मिलाप सिंह भरमौरी
त्वांग से लेकर विजयनगर तक
इक लम्बी चौडी सडक का निर्माण
सरहद को सुरक्षित करने का है
यह बहुत ही अच्छी कूटनीति का प्रमाण
क्यों न हो फिर यह आग बबूले
दो पडौसी हमारे जैसे फटे झौले से
सचमुच बिखेर रहा है अब उर्जा के पुंज
और कर रहा है तरक्की अपना हिन्दुस्तान
------- मिलाप सिंह भरमौरी
बेरोजगारी में राह चलते हुए
जब पडौसी मुस्कुराकर पूछता है
अभी काम नहीं बना कहीं पर बेटा
तो शर्म का दरिया सा मन में कूदता है
कामयाबी की तो कोई भी चर्चा
नहीं करता है इस जहाँ में लेकिन
नाकामयाबी में तो दोस्त हर कोई
यहाँ पर तरह तरह से मजे लूटता है
-------- मिलाप सिंह भरमौरी
समुन्दर के किनारे रेत पे लिखा
कब तक आखिर टिक पाएगा
आती हुई लहर से यकीनन
या पैरों से किसी के मिट जाएगा
क्योंकि मद से है अभी आंख भरी
जायज ही लगेगा अपना सब
जोश -जोश में होश कहाँ है
इसलिए खुद को ही मान रहा है रव
पर बेवक्त देखना इक दिन सब
तुझे जवर तेरा दिख जाएगा
----- मिलाप सिंह भरमौरी