milap singh

milap singh

Sunday, 19 October 2014

Happy Deepawali


दीपक जले मुंडेर पर
बंटने लगी मिठाइयां

सभी दोस्तों को हमारी ओर से
दिवाली की बधाईयाँ

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 18 October 2014

तेरी खुशबू छुपी है


तेरी  खुशबू  छुपी  है  हवाओं  में
आओ  झूमें  मस्त  फिजाओं  में
आज  लगता  है  इतना  रंगीन  जो  समां
तेरे  होठों  को छू  कर  आई  है  हवा
मैं  भी  रंग  जाऊं  आओ  बाहों  में

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 17 October 2014

बचपन


छोटी छोटी बातों पर जब
जोर से खुलकर रो लेते थे

बचपन के वो दिन
बहुत ही सुंदर होते थे

अपने पराये का पता नहीं था
सब कुछ न्यारा लगता था

चांद सितारों पर चलने के
जब सुंदर सपने बोते थे

------ मिलाप सिंह भरमौरी

सपने


बचपन में सपने भी
कितने सुन्दर आते थे
आसमान में बिन पंखों के
खुद को उडते पाते थे

थोडे से जब बडे हुए
स्कूल कालेज को जाने लगे
फिर सपनों में भी सुंदर सुंदर
हसीन चेहरे आने लगे

जब बुढापे में पहुंच गए
तो सपने भी डराने लगे
मरे हुए लोगों से फिर
शमशान घाट पर बतियाने लगे

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 16 October 2014

कर रहा तरक्की

त्वांग से लेकर विजयनगर तक
इक लम्बी चौडी सडक का निर्माण

सरहद को सुरक्षित करने का है
यह बहुत ही अच्छी कूटनीति का प्रमाण

क्यों न हो फिर यह आग बबूले
दो पडौसी हमारे जैसे फटे झौले से

सचमुच बिखेर रहा है अब उर्जा के पुंज
और कर रहा है तरक्की अपना हिन्दुस्तान

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 15 October 2014

बेरोजगारी में


बेरोजगारी में राह चलते हुए
जब पडौसी मुस्कुराकर पूछता है

अभी काम नहीं बना कहीं पर बेटा
तो शर्म का दरिया सा मन में कूदता है

कामयाबी की तो कोई भी चर्चा
नहीं करता है इस जहाँ में लेकिन

नाकामयाबी में तो दोस्त हर कोई
यहाँ पर तरह तरह से मजे लूटता है

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 14 October 2014

जवर तेरा


समुन्दर के किनारे रेत पे लिखा
कब तक आखिर टिक पाएगा

आती हुई लहर से यकीनन
या पैरों से किसी के मिट जाएगा

क्योंकि मद से है अभी आंख भरी
जायज ही लगेगा अपना सब

जोश -जोश में होश कहाँ है
इसलिए खुद को ही मान रहा है रव

पर बेवक्त देखना इक दिन सब
तुझे जवर तेरा दिख जाएगा

----- मिलाप सिंह भरमौरी