न मचल मेरे िदल न मचल
ये है खाबों का तेरे महल
खाव टूटेगा जाएगा िबखर
कोई उडता है क्या पँखो के िबन
कोई जीता है क्या सांसो के िबन
मान हकीकत तू थाम ले जीगर
न मचल मेरे .....
.....milap singh bharmouri
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न मचल मेरे िदल न मचल
ये है खाबों का तेरे महल
खाव टूटेगा जाएगा िबखर
कोई उडता है क्या पँखो के िबन
कोई जीता है क्या सांसो के िबन
मान हकीकत तू थाम ले जीगर
न मचल मेरे .....
.....milap singh bharmouri
िकसको दूर करूं
िकसको नजदीक करूं
जो बस में ही नहीं है
उसे कैसे ठीक करूं
ओर चारा ही नहीं हैं
ओर गूजारा ही नहीं
बस खूदा का नाम लूं
मैं और चुपचाप रहूं
.....milap singh bharmouri
उजाले की दोस्ती है
अनजान है तारीकी में
यहाँ तक ही पहूंच पाया
सोचा जब भी बारीकी में
इक तू ही साथ है बस
मूझे तेरी ही आस है
यूं तो िकतने ही लोग है
इस दहर-ए-शऱीकी में
.....milap singh bharmouri