चलने से टिकती है
और रुकने से गिर जाती है।
यह जिंदगी बिना स्टैंड की
साईकिल है।
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milap singh
Saturday, 17 March 2018
Saturday, 10 March 2018
वक़्त जुदाई का
दिल धीरे - धीरे घवरा जाता है।
जब वक़्त जुदाई का आ जाता है।
पल साथ बिताए याद आते हैं
और आंखों में पानी आ जाता हैै ।
क्यों खुशियां हर पल देता नहीं है
क्यों कहर खुदा ये ढा जाता है।
दिन की है बस चहल- पहल सब
शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
....... मिलाप सिंह भरमौरी
Friday, 9 March 2018
एक वक़्त था
बीत गया वक़्त जो साथ गुजारा था।
जब हर दिन हर लम्हा प्यारा था।
हमेशा न थी विरान यह जिंदगी अपनी
एक वक़्त था जब अपना जहां सारा था।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
Monday, 12 February 2018
नफरतें न बढाया करो
नफरतें न बढाया करो।
अच्छा है मुस्कुराया करो।
जीने को लिए है यह पल
हर पल जी को आया करो।
गम रोके जो आके कभी
तुम भी गम को चिढाया करो।
जहर लगती हैं खामोशियां
कहर इतना न ढाया करो।
कद्र बढ जाएगी देखना
तुम भी बातें बनाया करो।
याद करके गए वक्त को
यूं न आँसू बहाया करो।
..... मिलाप सिंह भरमौरी
Wednesday, 17 January 2018
खुद से करके देखें वैर
बात हुई जब खुद की तो
कह दिया झटसे छौडो खैर।
सच को हवा बताने वाले
झूठ के गिनते देखे पैर।
ओरों से नहीं हो पाएगा
आ खुद से करके देखें वैर।
चुल्लू भर में डूबने वाले
भला पाएगें सोचो कितना तैर।
..... मिलाप सिंह भरमौरी
Tuesday, 16 January 2018
लगन बनेगी सबल जीत की
चारों ओर दिवारे हैं ।
कुछ लम्हें मीठे खारे हैं।
उलझ गया है किस उलझन में
पतझड के बाद बहारें हैं।
जीत हुई है उनकी अक्कसर
जो कई मर्तवा हारे हैं।
रहता नहीं अँधियारा हमेशा
हर रात के बाद उजियारे हैं।
इक लगन बनेगी सबल जीत की
बाकि सब झूठे लारे है।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
Friday, 5 January 2018
कोख में बेटियां मार कर
क्यों बहशी बन रहा हदें शराफतों की लांघ कर।
अँधेरे में खो गया है तू खुद में कुछ सुधार कर ।
झूठी तमाम बातें हैं जो चौराहे पे लोग करते हैं
जन्नत नहीं मिलती कभी कोख में बेटियां मारकर ।
ये लालच से भरे हैं , कातिल खुद की सोचते हैं
पुण्य नहीं मिलता कभी खून की नदियां लांघकर।
यह कर्म धर्म की बातें कभी हिंसा नहीं सिखाती
अगर ऐसा कुछ कहा है तो इसमें कुछ सुधार कर।
~ मिलाप सिंह भरमौरी~