milap singh

milap singh

Monday, 15 April 2013

भरमौरी बोली की किवता

भरमौरी बोली में किवता

सब िकस्मत रे फेरे िहन
िदन जैडे मुंजो-तुजो घेरे िहन

असली होर ही मालक हा
असे बलदे तेरे ते मेरे िहन

जीतूनी बारी भी घरदा िदन
ईठी तीतूने ही सबेरे िहन

तेरे नाम तांऊ ही मुलना सुख
इँया ता छुडे िगट्टे परेडे िहन

......milap singh bharmouri

Friday, 12 April 2013

मुर्दों का ओपरेशन



काश!  ऐसा कोई 
करिश्मा हो जाये 
यह सारे बेरहम मंहगे होस्पिटल
 सरकारी हो जाए
सब को मिले अच्छी सुबिधा 
सबका जीवन आसान हो जाए 

यह चमचमाती बिल्डिंगे नही 
मानवता पर धव्वा है 
यह कोई समाज सेवा नही 
सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने का धंदा है 

यह अच्छे-अच्छो की
 तिजोरी को तंग कर देते है
डिलीवरी के नोर्मल केस की भी
 सर्जरी कर देते है
घिनौनापन यहाँ तक पहुंच चूका है अब तो
पैसो के लिए 
मुर्दों का भी ओपरेशन कर देते है 


काश!  ऐसा कोई 
करिश्मा हो जाये 
यह सारे बेरहम मंहगे होस्पिटल
 सरकारी हो जाए
सब को मिले अच्छी सुबिधा 
सबका जीवन आसान हो जाए 




           ....milap singh bharmouri

Thursday, 11 April 2013

न मचल मेरे िदल

न मचल मेरे िदल न मचल
ये है खाबों का तेरे महल
खाव टूटेगा जाएगा िबखर
कोई उडता है क्या पँखो के िबन
कोई जीता है क्या सांसो के िबन
मान हकीकत तू थाम ले जीगर
न मचल मेरे .....

.....milap singh bharmouri

Wednesday, 10 April 2013

खूदा का नाम

िकसको दूर करूं
िकसको नजदीक करूं
जो बस में ही नहीं है
उसे कैसे ठीक करूं
ओर चारा ही नहीं हैं
ओर गूजारा ही नहीं
बस खूदा का नाम लूं
मैं और चुपचाप रहूं

.....milap singh bharmouri

दहर-ए-शरीकी

उजाले की दोस्ती है
अनजान है तारीकी में
यहाँ तक ही पहूंच पाया
सोचा जब भी बारीकी में
इक तू ही साथ है बस
मूझे तेरी ही आस  है
यूं तो िकतने ही लोग है
इस दहर-ए-शऱीकी में

.....milap singh bharmouri

Tuesday, 9 April 2013

भ्रष्टाचार के खिलाफ


ये ईंटें नही फक्त
इनमे तारिख की 
निशानी है
इनमे हैवानों की 
हैवानियत है
और देशभक्तों की जवानी है
जरा गौर से देखो इन निशानों को 
गोलियां सहती लाशों और दीवारों को
देशभक्ति की ये प्रथा 
भ्रष्टाचार के खिलाफ 
आज भी हमको निभानी है


....milap singh bharmouri

Monday, 8 April 2013

मिटती क्यों नही गरीबी


अगर नामुमकिन नही है कुछ भी
इस जहान में 
तो मिटती क्यों नही गरीबी मेरे
हिंदुस्तान से 

इन झुगियों से जैसे कोई वास्ता नही है
इस चश्मे - पुरआव की कोई दास्ताँ नही है
बस निकल लेते है काफिले इधर से 
अनजान से 

नेमते -खुल्द -में वो जिए जा रहे है
सियासतों पे सियासत किए जा रहे है
देखें तो इक झलक इधर भी वो
सब्र - -ताव से 




....milap singh bharmouri


चश्मेपुरआव -- आंसुओं से भरी आँख , नेमते –खुल्द -- स्वर्ग जैसा सुख , सब्र - –ताव -- सहास से