बात हुई जब खुद की तो
कह दिया झटसे छौडो खैर।
सच को हवा बताने वाले
झूठ के गिनते देखे पैर।
ओरों से नहीं हो पाएगा
आ खुद से करके देखें वैर।
चुल्लू भर में डूबने वाले
भला पाएगें सोचो कितना तैर।
..... मिलाप सिंह भरमौरी
A place for original Hindi shayari sad shayari romantic shayari hindi kavita and pahari kavita of milap singh
बात हुई जब खुद की तो
कह दिया झटसे छौडो खैर।
सच को हवा बताने वाले
झूठ के गिनते देखे पैर।
ओरों से नहीं हो पाएगा
आ खुद से करके देखें वैर।
चुल्लू भर में डूबने वाले
भला पाएगें सोचो कितना तैर।
..... मिलाप सिंह भरमौरी
चारों ओर दिवारे हैं ।
कुछ लम्हें मीठे खारे हैं।
उलझ गया है किस उलझन में
पतझड के बाद बहारें हैं।
जीत हुई है उनकी अक्कसर
जो कई मर्तवा हारे हैं।
रहता नहीं अँधियारा हमेशा
हर रात के बाद उजियारे हैं।
इक लगन बनेगी सबल जीत की
बाकि सब झूठे लारे है।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
क्यों बहशी बन रहा हदें शराफतों की लांघ कर।
अँधेरे में खो गया है तू खुद में कुछ सुधार कर ।
झूठी तमाम बातें हैं जो चौराहे पे लोग करते हैं
जन्नत नहीं मिलती कभी कोख में बेटियां मारकर ।
ये लालच से भरे हैं , कातिल खुद की सोचते हैं
पुण्य नहीं मिलता कभी खून की नदियां लांघकर।
यह कर्म धर्म की बातें कभी हिंसा नहीं सिखाती
अगर ऐसा कुछ कहा है तो इसमें कुछ सुधार कर।
~ मिलाप सिंह भरमौरी~
दो हजार अठारह
-------------------------
चमक उठे किसमत का सितारा।
हर दिन हो सबका प्यारा प्यारा।
खुशियां पल पल आती जाएं
गम जीवन के हो नौ दो ग्यारह।
रौशन हो हर दिशा सोच की
मिटे अँधकार इस मन का सारा।
मन का भेद न बने किसी से
फले फुले स्वच्छ जीवन धारा।
विपत न आए कोई इस धरती पे
मंगलमय हो दो हजार अठारह।
~मिलाप सिंह भरमौरी~
मेरी और से आपको और आपके परिवार को नव वर्ष दो हजार अठारह के आगमन की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई। नया वर्ष आपके लिए मंगलमय हो।
उत्कर्ष हो हर्ष का ।
शुभ असर मिले संघर्ष का।
हर दिन लाए इक नई खुशी।
हो खुशियों से भरा कलेंडर नए वर्ष का ।
...... मिलाप सिंह भरमौरी
वर्ष 2018 के शुभ आगमन पर आपको और आपके परिवार को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
दरिया जब बनता है किनारे भी बन जाते हैं।
दुखों के आने पर सहारे भी मिल जाते हैं।
परिवर्तन तो तय है हर पल निरंतर चलता रहता
फूल पुराने मुरझाने पर पुष्प नए खिल जाते हैं।
नया नया वाकिफ है गम से आँसू तो निकलेगें
धीरे धीरे सब दुनिया के सांचे में ढल जाते हैं।
सुप्त पडा है जल तो क्या खामोशी भी तोडेगा
बहते हवा के झौंके से धारे भी बन जाते हैं।
............. मिलाप सिंह भरमौरी
दुनिया में बहुत नजारे देखे।
चांदनी रात में तारे देखे।
जो दिल को चीरते जाते थे
ऐसे भी बहुत इशारे देखे।
नदियां शहद मिलाती रहतीं
समुंद्र फिर भी खारे देखे।
दुनिया को दीया दिखाने वाले
वो खुद के आगे हारे देखे।
जिनको मसले मालूम न थे
वो भी सडकों पे लगाते नारे देखे।
....... मिलाप सिंह भरमौरी