milap singh

milap singh

Sunday, 21 December 2014

Roi bhana se


आज जब आया मैं उसे छोडकर
वो रोई मगर इक बहाना ढूंढ कर

फिर भी आई कुछ दूर चलके वो
छोड आया मगर अगले मोड पर

जमाने की होती हैं मजबूरियाँ भी
नहीं जिया जाता है मुंह मोड कर

शायद मुझे वो संग समझती होगी
मगर दिखाऊ कैसे दिल खोलकर

--------- मिलाप सिंह भरमौरी

No comments:

Post a Comment