milap singh

milap singh

Sunday, 15 October 2017

भूख

घायल पडा है मन उलझनों की सेज पर।
आती है हँसी बहुत तमाशा जग का देखकर।
यह मिटती क्यों नहीं, यह आखिर कैसी भूख है।
टुकडे हराम के ढूंड रहा इज्जत की रोटी फेंक कर।

                ......... मिलाप सिंह भरमौरी

बादल

बादल हट गए हैं सब
मौसम साफ लगता है।

जमीं पर गिरा पानी
फिर भी खिलाफ लगता है।

फिर उडेगा हवा में
जुडेगा मिलेगा कणों से।

अभी ग्रहन कर रहा है
सूरज से यह ताप लगता है।

........ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 15 September 2017

संयम

अपने ही नजरिए से
हर बात सोचने लगते हैं।

थोडी सी क्या हरकत हुई
जोर से भौंकने लगते हैं।

दूसरे की भी सुननी चाहिए
उसकी भी मजबूरी हो सकती है।

आज संयम जरा भी रहा नहीं
तुरंत  कोसने लगते हैें।

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 14 September 2017

समझौता

मुस्कुरा लेते हैं दर्द में
गम से धौखा कर लेते हैं।
छोड कर झगडा कोशिसों से
किस्मत से समझौता कर लेते हैं।

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 13 September 2017

जलना आता

जिनको नहीं कुछ करना आता।
उनको है बस जलना आता।
जो लोग अपने काम में व्यस्त हैं।
वही तो इस दुनिया में मस्त हैं ।

     ...... मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 9 September 2017

कारनामे

किस तरफ हैें निशाने हमने देखे है।
मत झूठ बोल हमनें भी आईने देखे हैं।
जो कहतेेे हैं बहुत शरीफ खुद को यहां,
उनके भी बहुत हमने कारनामें देखे हैं।

         ....... मिलाप सिंह भरमौरी