milap singh

milap singh

Sunday, 12 August 2018

लम्हा लम्हा

लम्हा लम्हा है मुश्किल

किस किस से लड़ता है ये दिल


इक ओर मोहब्बत के धोखे


इक ओर अधर में मुस्तकबिल ।

कभी तेरे संग के ख्बाब सजाऊँ


हवा में सुंदर महल बनाऊँ


बन्द आंखों से दुनिया अच्छी लगती


तकदीर भी मनचाही लगती


पर आंखे खुलते ही रोता है दिल।

यह प्यार मोहब्बत की बातें


अब हृदय पे करती हैं घातें


चेहरे बदलते देखे हैं कितने ही


कितनी ही स्मृति में छाई हैं यादें


सोच रहा हूँ तन्हा बैठे


आखिर ऐसा क्या किया उसने हासिल।

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 9 August 2018

नजरें

बच के निकलता हूँ

तेरी गली से

कि फिर तुमसे 

सामना न हो जाए।

बड़ी मुश्किल से

समेटे हैं दिल के टुकड़े

कि फिर वही 

मामला न हो जाए।

बहुत डरता हूँ तेरी

झुकी सी पलकों से

असर बहुत है

तेरी शोख़ नजरों में।

जानलेवा है बहुत

यह बेरुखी तेरी

दर्द सीने में वो फिर

वेवजह न हो जाए।

....... मिलाप सिंह भरमौरी

याद

नदी किनारे शाम को

जब दिन ढ़लता है।

सूरज धीरे- धीरे

पानी के बीच उतरता है।

ताजा हो जाती हैं फिर

भीगी सी यादें।

एक तूफान सा जैसे

आँखों के बीच उमड़ता है।

........ मिलाप सिंह भरमौरी


Tuesday, 24 July 2018

दूरियां

दूरियां बना देती हैं
मीलों की दरमियाँ
बड़ी बतमीज होती हैं
यह गलतफहमियां

Monday, 2 July 2018

बैठी हुई आँखे हैं

बैठी हुई आँखें हैं

और सूखे हुए गाल।

कुछ ठीक नहीं लगता 

तुम्हारा ये हाल।

जहर बन जाएगा

जो दिल में छुपा रखा है।

तू बाहर बहने दे आंसू

गम अपना निकल।

....... मिलाप सिंह भरमौरी



Tuesday, 3 April 2018

Badnam shayari


Badnan shayari

अच्छा नहीं है ये काम न करो।

बेटी किसी की यारो बदनाम न करो।

दफ़न करो बातें मिट्टी डालकर ।

ये बेआबरू की बातें तुम आम न करो।

....... मिलाप सिंह भरमौरी


Sunday, 1 April 2018

अवसर

यहां तु ही नहीं अकेला है 


कहना ओर भी कई मोड चुके हैं।

अपने किए हुए वादे महफ़िल में 


हजार तोड चुके हैं।

सुना है तरक्की बहुत पा रहें हैं 

वो आज उसी पेशे में।



जो कहते थे सबकी खातिर 


पेशा ही अपना हम छोड़ चुके हैं।

     ...... मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 17 March 2018

Jindgi

चलने से टिकती है
और रुकने से गिर जाती है।
यह जिंदगी बिना स्टैंड की
साईकिल है।

Saturday, 10 March 2018

वक़्त जुदाई का

दिल धीरे - धीरे घवरा जाता है।

जब वक़्त जुदाई का आ जाता है।


पल साथ बिताए याद आते हैं

और आंखों में पानी आ जाता हैै ।


क्यों खुशियां हर पल देता नहीं है

क्यों कहर खुदा ये ढा जाता है।


दिन की है बस चहल- पहल सब

शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।


....... मिलाप सिंह भरमौरी


Friday, 9 March 2018

एक वक़्त था

बीत गया वक़्त जो साथ गुजारा था।

जब हर दिन हर लम्हा प्यारा था।

हमेशा न थी विरान यह जिंदगी अपनी

एक वक़्त था जब अपना जहां सारा था।

       ...... मिलाप सिंह भरमौरी


Monday, 12 February 2018

नफरतें न बढाया करो

नफरतें  न   बढाया   करो।

अच्छा है  मुस्कुराया  करो।


जीने  को  लिए है यह पल

हर पल जी को आया करो।


गम  रोके  जो आके  कभी

तुम भी गम को चिढाया करो।


जहर लगती हैं खामोशियां

कहर  इतना  न  ढाया  करो।


कद्र  बढ   जाएगी  देखना

तुम  भी  बातें  बनाया  करो।


याद  करके   गए  वक्त  को

यूं   न  आँसू  बहाया    करो।

   ..... मिलाप  सिंह  भरमौरी 

Wednesday, 17 January 2018

खुद से करके देखें वैर

बात हुई जब खुद की तो
कह दिया झटसे छौडो खैर।

सच को हवा बताने वाले
झूठ के गिनते देखे पैर।

ओरों से नहीं हो पाएगा
आ खुद  से करके देखें वैर।

चुल्लू भर में डूबने वाले
भला पाएगें  सोचो  कितना तैर।

   ..... मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 16 January 2018

लगन बनेगी सबल जीत की

चारों ओर दिवारे हैं ।
कुछ लम्हें मीठे खारे हैं।

उलझ गया है किस उलझन में
पतझड के बाद बहारें हैं।

जीत हुई है उनकी अक्कसर
जो कई मर्तवा हारे हैं।

रहता नहीं अँधियारा हमेशा
हर रात के बाद उजियारे हैं।

इक लगन बनेगी सबल जीत की
बाकि सब झूठे लारे है।

...... मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 5 January 2018

कोख में बेटियां मार कर

क्यों बहशी बन रहा  हदें शराफतों की लांघ कर।
अँधेरे में खो गया  है तू खुद में  कुछ सुधार कर ।

झूठी  तमाम  बातें हैं जो  चौराहे पे लोग करते हैं
जन्नत नहीं मिलती कभी कोख में बेटियां मारकर ।

ये लालच से  भरे हैं , कातिल  खुद  की  सोचते हैं
पुण्य नहीं मिलता कभी खून की नदियां लांघकर।

यह कर्म धर्म की बातें कभी  हिंसा नहीं  सिखाती
अगर ऐसा कुछ कहा है तो इसमें कुछ सुधार कर।

                              ~ मिलाप सिंह भरमौरी~